Tuesday, May 26, 2020

World Environment Day Essay in Hindi || पर्यावरण दिवस पर निबन्ध || 5 जून...




पर्यावरण दिवस पर निबंध  || 5 जून || पर्यावरण दिवस || Environment Day Essay


World Environment Day in Hindi




5 जून को पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ के नेतृत्त्व में प्रत्येक वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस ( World Environment Day) मनाया जाता है । इसकी शुरुआत 1972 में 5 जून से 16 जून तक संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा आयोजित विश्व पर्यावरण सम्मेलन से हुई। 5 जून 1973 को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। जिसका मुख्य उद्देश्य लोगो को पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर जागरूक करना था जो की विश्व पर्यावरण दिवस मनाये जाने का मुख्य लक्ष्य था।

पर्यावरण का शाब्दिक अर्थ है परि + आवरण यानी चारो तरफ से घिरा हुआ एक ऐसा आवरण जो जीवन जीने के उपयुक्त बनाती है अर्थात हमारे चारो तरफ पाए जाने वाले पेड़- पौधे, वायु, पहाड़, मिट्टी, नदिया, जंगल, जीव-जन्तु आदि सभी मिलकर पर्यावरण का निर्माण करते है।

यानि बिना पर्यावरण के मानव या किसी भी जीव-जन्तु, पेड़ पौधे, वनस्पति आदि किसी का भी अस्त्तिव नही है सभी एक दुसरे के पूरक है यदि इनमे किसी में भी बदलाव होता है तो इसका असर सभी के ऊपर देखने को मिलता है. विश्व पर्यावरण दिवस के माध्यम से लोगो को पर्यावरण के प्रति सुरक्षा को लेकर जागरूक करने के लिए विभिन्न प्रकार के क्रियाकलाप आयोजित किये जाते है जिनमे नाटक, नुक्कड़ मंच, सफाई और प्रदुषण के प्रति लोगो को जागरूक करना, भाषण, संवाद जैसे अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिसमे लोग भाग लेकर पर्यावरण की कैसे सुरक्षा कैसे किया जा सकता है इसके प्रति जागरूक होते है।

मानव और पर्यावरण एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं। पर्यावरण जैसे जलवायु प्रदूषण या वृक्षों का कम होना मानव शरीर और स्वास्थय पर सीधा असर डालता है। मानव की अच्छी-बूरी आदतें जैसे वृक्षों को सहेजना, जलवायु प्रदूषण रोकना, स्वच्छाता रखना भी पर्यावरण को प्रभावित करती है। मानव की बूरी आदतें जैसे पानी दूषित करना, बर्बाद करना, वृक्षों की अत्यधिक मात्रा में कटाई करना आदि पर्यावरण को बूरी तरह से प्रभावित करती है। जिसका नतीजा बाद में मानव को प्राकर्तिक आपदाओं का सामना करके भुगतना ही पड़ता है।संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित यह दिवस पर्यावरण के प्रति वैश्विक स्तर पर जागरूकता लाने के लिए मनाया जाता है।

विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगो को पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर जागरूक करना है इस विश्व पर्यावरण दिवस के माध्यम से लोगो में यह प्रेरित किया जाता है की कैसे हम अपनी संसाधनों को पूरा करते हुए भी पर्यावरण की सुरक्षा को बनाये रखे.

Tuesday, May 5, 2020

बुद्ध पूर्णिमा पर निबंध || Essay on Buddha Purnima in Hindi || बुद्ध जयं...






बुद्ध पूर्णिमा पर निबंध Essay on Buddha Purnima in Hindi



'बुद्ध पूर्णिमा', बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए सबसे बड़ा त्यौहार होता है। इसको 'बुद्ध जयंती' के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू कैलेण्डर के अनुसार वैशाख माह की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाती है। इसीलिये इसे 'वैशाख पूर्णिमा' भी कहा जाता है। यह गौतम बुद्ध की जयंती है। भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण ये तीनों एक ही दिन अर्थात वैशाख पूर्णिमा के दिन ही हुए थे।

बौद्ध धर्म के अनुयायी बुद्ध पूर्णिमा को सम्पूर्ण विश्व मेँ बहुत धूमधाम से मनाते हैं। बुद्ध जयंती का मुख्य उत्सव बोध गया में होता है। बौद्ध धर्म के लोगों के लिए, बोध गया गौतम बुद्ध के जीवन से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। बोध गया श्राइन, बुद्ध की प्रबुद्धता की जगह को चिह्नित करती है। बोध गया भारत में बिहार के गया जिले में एक छोटा सा शहर है। बौद्ध पूर्णिमा के दिन भक्त मंदिरों में दान करते हैं।
भगवान बुद्ध की शिक्षाएं व नियम

बुद्ध की शिक्षाएं पूरी तरह से मनुष्यों को दुख और जीवन के पीड़ा से मुक्त करने के लिए हैं। बौद्ध धर्म की प्राथमिक शिक्षाएं चार मुक्य सत्य, आठवें पथ और अवधारणाएं हैं। यह चार परम सत्य बौद्ध धर्म की नींव हैं। इन चार सत्यों पर केंद्रित उनके ज्ञान के बाद बुद्ध का पहला उपदेश – 

चार परम सत्य 

सभी मानव परिस्थितियों में पीड़ा होती है।
पीड़ा का कारण होता है।
वह कारण लालसा या इच्छा है।
पीड़ा के समापन के लिए एक ही रास्ता है।
आठ पथ Eight paths

चौथा नोबल सत्य आठवां पथ है, या अभ्यास के आठ क्षेत्रों जो जीवन के सभी पहलुओं को छूते हैं।
सही विश्वास (सत्य में)
सही इरादा (बुराई के बजाय अच्छा करने में)
सही भाषण (असत्य, निंदा और शपथ ग्रहण से बचें)
सही व्यवहार (दोष पूर्ण व्यवहार से बचें)
सही आजीविका (कुछ व्यवसाय जैसे कसाई, प्रचारक, अपमानित थे)
सही प्रयास (अच्छे की तरफ)
सही अनुष्ठान (सत्य का)
सही एकाग्रता (इन नियमों का पालन करने के परिणामस्वरूप)
अवधारणाएं Concepts

बौद्ध धर्म का मानना ​​है कि एक व्यक्ति कुल सही दिशा में आगे बढ़ना तब शुरू कर सकता है जब वह बुद्ध और उनकी शिक्षाओं और उनके मठों में विश्वास रखे। साथ ही पांच मौलिक नैतिक नियमों को अपना कर भी-
हत्या नहीं करना
चोरी नहीं करना
लैंगिक दुराचार या व्यभिचार से विरत रहना
झूठ कभी नहीं बोलना
नशे की लत से दूर

Sunday, May 3, 2020

मदर्स डे पर निबंध || मातृ दिवस पर निबंध || Mother's Day Essay in Hindi...






मदर्स डे पर निबंध – मातृ दिवस पर निबंध – Mother Day Essay in Hindi


मातृ दिवस का मतलब होता है मां का दिन। पूरी दुनिया में मई माह के दूसरे रविवार को मातृ दिवस मनाया जाता है। मातृ दिवस मनाने का प्रमुख उद्देश्य मां के प्रति सम्मान और प्रेम को प्रदर्शित करना है। हर जगह मातृ दिवस मनाने का तरीका अलग-अलग होता है, लेकिन इसका उद्देश्य एक ही होता है।

मातृ दिवस 

मातृ दिवस मनाने का शुरुआत सर्वप्रथम ग्रीस देश में हुई थी, जहां देवताओं की मां को पूजने का चलन शुरु हुआ था। इसके बाद इसे त्योहार की तरह मनाया जाने लगा। हर मां अपने बच्चों के प्रति जीवन भर समर्पित होती है। मां के त्याग की गहराई को मापना भी संभव नहीं है और ना ही उनके एहसानों को चुका पाना। लेकिन उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता को प्रकट करना हमारा कर्तव्य है।

मां के प्रति इन्हीं भावों को व्यक्त करने के उद्देश्य से मातृ दिवस मनाया जाता है। यह दिन विशेष रूप से मां के लिए समर्पित है। इस दिन को दुनिया भर में लोग अपने तरीके से मनाते हैं। कहीं पर मां के लिए पार्टी का आयोजन होता है तो कहीं उन्हें उपहार और शुभकामनाएं दी जाती है। कहीं पर पूजा अर्चना तो कुछ लोग मां के प्रति अपनी भावनाएं लिखकर जताते हैं।

मदर्स डे एक ऐसा दिन होता है जो हर बच्चा अपनी माँ के लिये खासतौर से मनाता है। ये एक महत्वपूर्णं उत्सव के तौर पर हर वर्ष मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। स्कूलों में बच्चों के साथ मातृ-दिवस मनाने का प्रचलन है। अपने बच्चों के द्वारा माँ ग्रीटिंग्स कार्ड, विशिंग कार्ड तथा दूसरे खास उपहार प्राप्त करती है। इस दिन पारिवारिक सदस्य बाहर जाकर लज़ीज़ पकवानों का लुफ्त उठाते है तथा और खुशी मनाते है। माँ भी अपने प्यारे बच्चों को ढ़ेर सारा प्यार और उपहार तथा देख-भाल करती है।

स्कूल आने के लिये बच्चों के द्वारा खासतौर से अपनी माँ को आमंत्रित किया जाता है जहाँ पर शिक्षक, बच्चे और माँ मातृ-दिवस को खूब अच्छे से मनाते है। माँ अपने बच्चों के लिये उनकी पसंद के मुताबिक मैक्रोनी, चाउमीन, मिठाई, बिस्किट आदि जैसे कुछ खास पकवान बनाती है। इस दिन को पूरी मस्ती के साथ मनाने के लिये माँ और बच्चे दोनों नृत्य, गायन, भाषण आदि जैसे क्रिया-कलापों में भी भाग लेते है। मातृ-दिवस से संबंधित कार्यक्रमों जैसे गायन, नृत्य, भाषण, तुकबंदी व्याख्यान, निबंध लेखन तथा मौखिक बातचीत आदि में बच्चे भाग लेते है। उत्सव के समापन पर माताओं के द्वारा बनाया गया खास पकवान शिक्षकों और विद्यार्थियों को परोसा जाता है। सभी एकसाथ इसको खाते है और इसका आनन्द उठाते है।


हमारी माँ बहुत खास होती है। थकी हुई होने के बावजूद वह हमारे लिये हमेशा मुस्कुराती रहती है। रात में सोते समय वह हमें बहुत सारी कविताएँ और कहानियाँ सुनाती है। माँ हमारे गृह-कार्य, प्रोजेक्ट और परीक्षा के समय बहुत मदद करती है। वह हमारे स्कूल ड्रेस का ध्यान रखती है। वह हमें सिखाती है कि खाना खाने से पहले हाथ को अच्छी तरह से साबुन से धो लेना चाहिये। वह हमें अच्छा शऊर, शिष्टाचार, नैतिकता, इंसानियत और हमेशा दूसरो की मदद करना सिखाती है। वह हमारे पिता, दादा-दादी और छोटी बहन का ध्यान रखती है। हम सभी उनको बहुत प्यार करते है और हर सप्ताह उन्हें बाहर घुमाने ले जाते है।