Wednesday, June 17, 2020
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भाषण || Speech on International Yoga Day in H...
माननीय प्रधानाचार्य, आदरणीय प्रमुख अतिथि, शिक्षकगण और मेरे प्यारे विद्यार्थियों - सभी को नमस्कार!
अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को मनाया जाता है। यह दिन वर्ष का सबसे लम्बा दिन होता है और योग भी मनुष्य को दीर्घ जीवन प्रदान करता है। पहली बार यह दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया, जिसकी पहल भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की थी
आप सभी जानते हैं कि योग का महत्व जीवन में कितना ज्यादा है। योग की मदद से हम कई सारे विकारों को दूर कर सकते हैं। योग हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य है। अगर नियमित तौर पर, रोज सुबह उठकर योग का अभ्यास किया जाया करे, तो योग हर तरह के उपचार एवं चिकित्सा से ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। नियमित योग करने से शरीर सभी बिमारियों से दूर रहता है। योगा भारत में उत्पन्न हुआ था और इसलिए इसे "योगा" के रूप में दुनिया भर में जाना जाता है। यह हमारे शरीर से नकारात्मकता और मानसिक रोगों को दूर करने में मदद करता है। यह तनाव स्तर को कम करने और जागरूकता बढ़ाने में मदद करता है। विशेष रूप से बच्चों के लिए यह एकाग्रता शक्ति और फोकस के निर्माण में मदद करता है।
इस साल 21 जून 2020 को योग दिवस की थीम 'घर पर योग और परिवार के साथ योग है। इस थीम के मुताबिक, लोग 21 जून को सोशल मीडिया के माध्यम से सुबह सात बजे अपने परिवार के साथ योग दिवस में शामिल हो सकेंगे।
धन्यवाद।
Monday, June 15, 2020
पितृ दिवस पर निबंध || Father’s day (21 जून) Essay || Speech on Father's ...
पिता दिवस बच्चों के जीवन के विकास में पिता के योगदान को पहचानने के लिए दुनिया भर में मनाया जाता है। इस दिन हर कोई अपने पिता को विशेष महसूस कराने की कोशिश करता है। इस साल Father's day 21 जून 2020 को मनाया जाएगा। पिता हर परिवार में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति होता है। वह अपने परिवार की ख़ुशी के लिए दिन-रात मेहनत करता है। एक पिता वह होता है जो अपने बच्चों और परिवार का ख्याल रखता है। पिता के महान बलिदान के लिए धन्यवाद देने और सम्मानित करने के लिए ही Fathers Day मनाया जाता है।
फादर्स डे की शुरूआत अमेरिका के वाशिंगटन से हुई थी।
सबसे पहले फादर्स डे को 19 जून 1910 मनाया गया था।
सोनोरा डॉड (Sonora Dodd) ने अपने पिता की याद में वॉशिंगटन के स्पोकेन शहर में इस दिन की शुरुआत की थी। सोनोरा डॉड के पिता एक किसान थे और सेना में अपनी भूमिका निभा चुके थे। सोनोरा डॉड की माँ की मृत्यु उनके बचपन में हो गई थी। इसके बाद उनके पिता ने उन्हें माता और पिता दोंनों का प्यार दिया था। फादर्स डे (Father’s Day) को मनाने की बात सोनोरा डॉड के दिमाग में मदर्स डे के दिन से आई थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन (Woodrow Wilson) सन 1916 में ने फादर्स डे को मनाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी।
अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने 1966 में इसे जून के तीसरे रविवार को मनाने का फैसला किया।
जिस प्रकार माँ हमारी प्रथम शिक्षिका होती है तो पिता भी एक गुरु के समान होता है जो अपने संतान रूपी शिष्य को भले ही बाहर से डांट पड़ती है लेकिन अंदर से अपने शिष्य को सम्हालते हुए जीवन में आगे बढ़ने का पाठ पढ़ाते है।
अर्थात गुरु यानी पिता उस कुम्हार के समान होता है जो अपने घड़े को सुंदर बनाने के लिए घड़े के अंदर हाथ डालते हुए बाहर से थाप देता है और उसे एक सुंदर घड़े का रूप देता है,
ठीक उसी प्रकार एक पिता भी एक गुरु के रूप में अपने शिष्य रूपी सन्तान को कठोर अनुशासन रखते हुए लेकिन मन से प्रेम भावना रखते हुए अपने बेटो को बुराई के रास्ते से बचाते हुए इस संसार में अपने संतान को सम्मानित बनाता है और और उसे सफलता के मार्ग अपर ले जाता है।
इस प्रकार जब बच्चे छोटे होते है तो पिता के रूप में अच्छे बुरे का फर्क सिखाते है और यही बच्चे जब बड़े हो जाते है तो पिता अपने बच्चो के दोस्त बनाकर एक सलाहकार के रूप में आगे बढने का मार्ग प्रसस्त करते है.।
Saturday, June 6, 2020
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस निबंध || International Yoga Day Essay in Hindi |...
योग दिवस निबंध
Yoga Day Essay in Hindi
प्रस्तावना
योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृति के युज से हुई है, जिसका मतलब होता है आत्मा का सार्वभौमिक चेतना से मिलन। योग, मन, शरीर और आत्मा की एकता को सक्षम बनाता है। योग के विभिन्न रूपों से हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को अलग-अलग तरीकों से लाभ मिलता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को इस अनूठी कला का आनंद लेने के लिए मनाया जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस
वर्ष 2014 में भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव दिया। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) को यह प्रस्ताव पसंद आया और 21 जून 2015 को पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। श्री मोदी द्वारा प्रस्तावित प्रस्ताव और यू.एन. द्वारा किए गए निर्णय की दुनिया भर के आध्यात्मिक नेताओं और योग के चिकित्सकों द्वारा इसकी सराहना की गई।
पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया। इस दिन पर भारत में एक बड़ा आयोजन आयोजित किया गया था।
भगवद्गीता में योग के जो तीन प्रमुख प्रकार बताए गए हैं वे निम्न हैं-
1 कर्मयोग - इसमें व्यक्ति अपने स्थिति के उचित और कर्तव्यों के अनुसार कर्मों का श्रद्धापूर्वक निर्वाह करता है।
2 भक्ति योग - इसमें भगवत कीर्तन प्रमुख है। इसे भावनात्मक आचरण वाले लोगों को सुझाया जाता है।
3 ज्ञान योग -
इसमें ज्ञान प्राप्त करना अर्थात ज्ञानार्जन करना शामिल है।
इसी तरह अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर देश के कई हिस्सों में कई बड़े और छोटे समारोह आयोजित किए गए। भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक दल के सभी सैनिकों ने भी विभिन्न हिस्सों में मनाए जाने वाले योग दिवस के समारोहों में भाग लिया। हमारे पड़ोसी देशों और दुनिया भर के अन्य देशों ने भी समान उत्साह के साथ इस दिन को मनाया।
निष्कर्ष
21 जून को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस प्राचीन भारतीय कला के लिए एक अनुष्ठान है। हमारे दैनिक जीवन में योग को जन्म देने से हमारे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ सकता है। यह हमारे तनावपूर्ण जीवन के लिए एक बड़ी राहत प्रदान करता है।
Tuesday, May 26, 2020
World Environment Day Essay in Hindi || पर्यावरण दिवस पर निबन्ध || 5 जून...
पर्यावरण दिवस पर निबंध || 5 जून || पर्यावरण दिवस || Environment Day Essay
World Environment Day in Hindi
5 जून को पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ के नेतृत्त्व में प्रत्येक वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस ( World Environment Day) मनाया जाता है । इसकी शुरुआत 1972 में 5 जून से 16 जून तक संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा आयोजित विश्व पर्यावरण सम्मेलन से हुई। 5 जून 1973 को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। जिसका मुख्य उद्देश्य लोगो को पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर जागरूक करना था जो की विश्व पर्यावरण दिवस मनाये जाने का मुख्य लक्ष्य था।
पर्यावरण का शाब्दिक अर्थ है परि + आवरण यानी चारो तरफ से घिरा हुआ एक ऐसा आवरण जो जीवन जीने के उपयुक्त बनाती है अर्थात हमारे चारो तरफ पाए जाने वाले पेड़- पौधे, वायु, पहाड़, मिट्टी, नदिया, जंगल, जीव-जन्तु आदि सभी मिलकर पर्यावरण का निर्माण करते है।
यानि बिना पर्यावरण के मानव या किसी भी जीव-जन्तु, पेड़ पौधे, वनस्पति आदि किसी का भी अस्त्तिव नही है सभी एक दुसरे के पूरक है यदि इनमे किसी में भी बदलाव होता है तो इसका असर सभी के ऊपर देखने को मिलता है. विश्व पर्यावरण दिवस के माध्यम से लोगो को पर्यावरण के प्रति सुरक्षा को लेकर जागरूक करने के लिए विभिन्न प्रकार के क्रियाकलाप आयोजित किये जाते है जिनमे नाटक, नुक्कड़ मंच, सफाई और प्रदुषण के प्रति लोगो को जागरूक करना, भाषण, संवाद जैसे अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिसमे लोग भाग लेकर पर्यावरण की कैसे सुरक्षा कैसे किया जा सकता है इसके प्रति जागरूक होते है।
मानव और पर्यावरण एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं। पर्यावरण जैसे जलवायु प्रदूषण या वृक्षों का कम होना मानव शरीर और स्वास्थय पर सीधा असर डालता है। मानव की अच्छी-बूरी आदतें जैसे वृक्षों को सहेजना, जलवायु प्रदूषण रोकना, स्वच्छाता रखना भी पर्यावरण को प्रभावित करती है। मानव की बूरी आदतें जैसे पानी दूषित करना, बर्बाद करना, वृक्षों की अत्यधिक मात्रा में कटाई करना आदि पर्यावरण को बूरी तरह से प्रभावित करती है। जिसका नतीजा बाद में मानव को प्राकर्तिक आपदाओं का सामना करके भुगतना ही पड़ता है।संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित यह दिवस पर्यावरण के प्रति वैश्विक स्तर पर जागरूकता लाने के लिए मनाया जाता है।
विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगो को पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर जागरूक करना है इस विश्व पर्यावरण दिवस के माध्यम से लोगो में यह प्रेरित किया जाता है की कैसे हम अपनी संसाधनों को पूरा करते हुए भी पर्यावरण की सुरक्षा को बनाये रखे.
Tuesday, May 5, 2020
बुद्ध पूर्णिमा पर निबंध || Essay on Buddha Purnima in Hindi || बुद्ध जयं...
बुद्ध पूर्णिमा पर निबंध Essay on Buddha Purnima in Hindi
'बुद्ध पूर्णिमा', बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए सबसे बड़ा त्यौहार होता है। इसको 'बुद्ध जयंती' के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू कैलेण्डर के अनुसार वैशाख माह की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाती है। इसीलिये इसे 'वैशाख पूर्णिमा' भी कहा जाता है। यह गौतम बुद्ध की जयंती है। भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण ये तीनों एक ही दिन अर्थात वैशाख पूर्णिमा के दिन ही हुए थे।
बौद्ध धर्म के अनुयायी बुद्ध पूर्णिमा को सम्पूर्ण विश्व मेँ बहुत धूमधाम से मनाते हैं। बुद्ध जयंती का मुख्य उत्सव बोध गया में होता है। बौद्ध धर्म के लोगों के लिए, बोध गया गौतम बुद्ध के जीवन से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। बोध गया श्राइन, बुद्ध की प्रबुद्धता की जगह को चिह्नित करती है। बोध गया भारत में बिहार के गया जिले में एक छोटा सा शहर है। बौद्ध पूर्णिमा के दिन भक्त मंदिरों में दान करते हैं।
भगवान बुद्ध की शिक्षाएं व नियम
बुद्ध की शिक्षाएं पूरी तरह से मनुष्यों को दुख और जीवन के पीड़ा से मुक्त करने के लिए हैं। बौद्ध धर्म की प्राथमिक शिक्षाएं चार मुक्य सत्य, आठवें पथ और अवधारणाएं हैं। यह चार परम सत्य बौद्ध धर्म की नींव हैं। इन चार सत्यों पर केंद्रित उनके ज्ञान के बाद बुद्ध का पहला उपदेश –
चार परम सत्य
सभी मानव परिस्थितियों में पीड़ा होती है।
पीड़ा का कारण होता है।
वह कारण लालसा या इच्छा है।
पीड़ा के समापन के लिए एक ही रास्ता है।
आठ पथ Eight paths
चौथा नोबल सत्य आठवां पथ है, या अभ्यास के आठ क्षेत्रों जो जीवन के सभी पहलुओं को छूते हैं।
सही विश्वास (सत्य में)
सही इरादा (बुराई के बजाय अच्छा करने में)
सही भाषण (असत्य, निंदा और शपथ ग्रहण से बचें)
सही व्यवहार (दोष पूर्ण व्यवहार से बचें)
सही आजीविका (कुछ व्यवसाय जैसे कसाई, प्रचारक, अपमानित थे)
सही प्रयास (अच्छे की तरफ)
सही अनुष्ठान (सत्य का)
सही एकाग्रता (इन नियमों का पालन करने के परिणामस्वरूप)
अवधारणाएं Concepts
बौद्ध धर्म का मानना है कि एक व्यक्ति कुल सही दिशा में आगे बढ़ना तब शुरू कर सकता है जब वह बुद्ध और उनकी शिक्षाओं और उनके मठों में विश्वास रखे। साथ ही पांच मौलिक नैतिक नियमों को अपना कर भी-
हत्या नहीं करना
चोरी नहीं करना
लैंगिक दुराचार या व्यभिचार से विरत रहना
झूठ कभी नहीं बोलना
नशे की लत से दूर
Sunday, May 3, 2020
मदर्स डे पर निबंध || मातृ दिवस पर निबंध || Mother's Day Essay in Hindi...
मदर्स डे पर निबंध – मातृ दिवस पर निबंध – Mother Day Essay in Hindi
मातृ दिवस का मतलब होता है मां का दिन। पूरी दुनिया में मई माह के दूसरे रविवार को मातृ दिवस मनाया जाता है। मातृ दिवस मनाने का प्रमुख उद्देश्य मां के प्रति सम्मान और प्रेम को प्रदर्शित करना है। हर जगह मातृ दिवस मनाने का तरीका अलग-अलग होता है, लेकिन इसका उद्देश्य एक ही होता है।
मातृ दिवस
मातृ दिवस मनाने का शुरुआत सर्वप्रथम ग्रीस देश में हुई थी, जहां देवताओं की मां को पूजने का चलन शुरु हुआ था। इसके बाद इसे त्योहार की तरह मनाया जाने लगा। हर मां अपने बच्चों के प्रति जीवन भर समर्पित होती है। मां के त्याग की गहराई को मापना भी संभव नहीं है और ना ही उनके एहसानों को चुका पाना। लेकिन उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता को प्रकट करना हमारा कर्तव्य है।
मां के प्रति इन्हीं भावों को व्यक्त करने के उद्देश्य से मातृ दिवस मनाया जाता है। यह दिन विशेष रूप से मां के लिए समर्पित है। इस दिन को दुनिया भर में लोग अपने तरीके से मनाते हैं। कहीं पर मां के लिए पार्टी का आयोजन होता है तो कहीं उन्हें उपहार और शुभकामनाएं दी जाती है। कहीं पर पूजा अर्चना तो कुछ लोग मां के प्रति अपनी भावनाएं लिखकर जताते हैं।
मदर्स डे एक ऐसा दिन होता है जो हर बच्चा अपनी माँ के लिये खासतौर से मनाता है। ये एक महत्वपूर्णं उत्सव के तौर पर हर वर्ष मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। स्कूलों में बच्चों के साथ मातृ-दिवस मनाने का प्रचलन है। अपने बच्चों के द्वारा माँ ग्रीटिंग्स कार्ड, विशिंग कार्ड तथा दूसरे खास उपहार प्राप्त करती है। इस दिन पारिवारिक सदस्य बाहर जाकर लज़ीज़ पकवानों का लुफ्त उठाते है तथा और खुशी मनाते है। माँ भी अपने प्यारे बच्चों को ढ़ेर सारा प्यार और उपहार तथा देख-भाल करती है।
स्कूल आने के लिये बच्चों के द्वारा खासतौर से अपनी माँ को आमंत्रित किया जाता है जहाँ पर शिक्षक, बच्चे और माँ मातृ-दिवस को खूब अच्छे से मनाते है। माँ अपने बच्चों के लिये उनकी पसंद के मुताबिक मैक्रोनी, चाउमीन, मिठाई, बिस्किट आदि जैसे कुछ खास पकवान बनाती है। इस दिन को पूरी मस्ती के साथ मनाने के लिये माँ और बच्चे दोनों नृत्य, गायन, भाषण आदि जैसे क्रिया-कलापों में भी भाग लेते है। मातृ-दिवस से संबंधित कार्यक्रमों जैसे गायन, नृत्य, भाषण, तुकबंदी व्याख्यान, निबंध लेखन तथा मौखिक बातचीत आदि में बच्चे भाग लेते है। उत्सव के समापन पर माताओं के द्वारा बनाया गया खास पकवान शिक्षकों और विद्यार्थियों को परोसा जाता है। सभी एकसाथ इसको खाते है और इसका आनन्द उठाते है।
हमारी माँ बहुत खास होती है। थकी हुई होने के बावजूद वह हमारे लिये हमेशा मुस्कुराती रहती है। रात में सोते समय वह हमें बहुत सारी कविताएँ और कहानियाँ सुनाती है। माँ हमारे गृह-कार्य, प्रोजेक्ट और परीक्षा के समय बहुत मदद करती है। वह हमारे स्कूल ड्रेस का ध्यान रखती है। वह हमें सिखाती है कि खाना खाने से पहले हाथ को अच्छी तरह से साबुन से धो लेना चाहिये। वह हमें अच्छा शऊर, शिष्टाचार, नैतिकता, इंसानियत और हमेशा दूसरो की मदद करना सिखाती है। वह हमारे पिता, दादा-दादी और छोटी बहन का ध्यान रखती है। हम सभी उनको बहुत प्यार करते है और हर सप्ताह उन्हें बाहर घुमाने ले जाते है।
Sunday, April 26, 2020
मज़दूर दिवस पर निबंध || Simple & Short Essay on Labour Day in Hindi || L...
मज़दूर दिवस पर निबंध- Essay on Labour Day in Hindi
प्रस्तावना
विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस “1 मई” के दिन मनाया जाता है। किसी भी देश की तरक्की उस देश के किसानों तथा कामगारों (मजदूर / कारीगर) पर निर्भर होती है। किसी समाज, देश, उद्योग, संस्था, व्यवसाय को खड़ा करने के लिये कामगारों (कर्मचारीयों) की विशेष भूमिका होती है।
मजदुरों के बिना किसी भी देश का विकास नहीं किया जा सकता है और न हीं कोई उद्योग कार्य कर सकता है। मजदुर दिवस को श्रमिक दिवस और मई डे के नाम से भी जाना जाता है। यह ज्यादातर 1 मई को मनाया जाता है।
अधिकांश देशों में यह सार्वजनिक अवकाश का दिन है। यह 1 मई को 80 से अधिक देशों में मनाया जाता है। कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका सितंबर के पहले सोमवार को इसे मनाते हैं। इस तिथि को मनाने के लिए कई देशों की अपनी अलग-अलग तिथि है। हालांकि उत्सव को मनाने का कारण एक समान रहता है और वह श्रम वर्ग की कड़ी मेहनत का जश्न मनाने के लिए है।
मजदूर दिवस की उत्पत्ति
इसकी शुरूआत अमेरिका के शिकागो की हेय मार्केट से हुई 1 मई, 1886 से हुई थी। वहाँ के मजदुरों ने कार्य करने के सीमा 10-12 घंटे तक हटाकर 8 घंटे करने के लिए हड़ताल की थी। उस दिन पुलिस द्वारा चलाई गई गोलियों से सात लोगों की मौत हुई। लेकिन अंत में मजदुरों की माँग मान ली गई थी।
भारत में मजदूर दिवस –
1923 में भारत में मजदुर दिवस पहली बार चैन्नई में मनाया गया था। यह उत्सव भारतीय श्रमिक किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान द्वारा मद्रास में आयोजित किया गया था। इस दिन कॉमरेड सिंगारवेलियर ने राज्य में विभिन्न स्थानों पर दो बैठकें आयोजित कीं। इनमें से एक का आयोजन ट्रालीकलान बीच पर किया गया था और दूसरी को मद्रास हाई कोर्ट के समीप समुद्र तट पर व्यवस्थित किया गया था। उन्होंने एक संकल्प पारित कर कहा कि सरकार को इस दिन राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा करनी चाहिए।
महाराष्ट्र राज्य में 1 मई को महाराष्ट्र दिवस के रूप में मनाया जाता है और गुजरात में इसे गुजरात दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका कारण यह है कि 1960 में इसी दिन महाराष्ट्र और गुजरात को राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ था।
भारत में मजदूर दिवस – उत्सव
बहुत संघर्ष के बाद श्रमिकों को उनके अधिकार दिए गए थे। जिन्होंने इस दिवस के लिए कड़ी मेहनत की उन्होंने इसके महत्व को और अधिक बढ़ा दिया। इस दिन का उनके लिए विशेष महत्व था। इस प्रकार अधिकांश देशों में श्रम दिवस समारोह ने शुरू में अपने संघ के उन नेताओं को सम्मान देने का काम किया जिन्होंने इस विशेष दिन का दर्जा हासिल किया और दूसरों को अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया। प्रमुख नेताओं और श्रमिकों द्वारा एक साथ प्रसन्नता के साथ समय बिताने पर भाषण दिए जाते हैं।
ट्रेड यूनियन मजदूरों की टीम के लिए विशेष लंच और रात्रिभोज या संगठित पिकनिक और आउटिंग आयोजित करते हैं। कार्यकर्ताओं के अधिकारों का जश्न मनाने के लिए अभियान और परेड आयोजित की जाती हैं। पटाखे भी जलाए जाते हैं।
जहाँ कई संगठन और समूहों द्वारा इस दिन पर लंच और पिकनिक और ट्रेड यूनियनों द्वारा अभियान तथा परेड आयोजित किए जाते हैं वहीँ कई लोग इस दिन को बस आराम करने और फिर से जीवंत करने के अवसर के रूप में देखते हैं। वे अपने लंबित घरेलू कार्यों को पूरा करने में समय व्यतीत करते हैं या अपने दोस्तों और परिवार के साथ बाहर जाते हैं।
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