Tuesday, May 26, 2020
World Environment Day Essay in Hindi || पर्यावरण दिवस पर निबन्ध || 5 जून...
पर्यावरण दिवस पर निबंध || 5 जून || पर्यावरण दिवस || Environment Day Essay
World Environment Day in Hindi
5 जून को पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ के नेतृत्त्व में प्रत्येक वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस ( World Environment Day) मनाया जाता है । इसकी शुरुआत 1972 में 5 जून से 16 जून तक संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा आयोजित विश्व पर्यावरण सम्मेलन से हुई। 5 जून 1973 को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। जिसका मुख्य उद्देश्य लोगो को पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर जागरूक करना था जो की विश्व पर्यावरण दिवस मनाये जाने का मुख्य लक्ष्य था।
पर्यावरण का शाब्दिक अर्थ है परि + आवरण यानी चारो तरफ से घिरा हुआ एक ऐसा आवरण जो जीवन जीने के उपयुक्त बनाती है अर्थात हमारे चारो तरफ पाए जाने वाले पेड़- पौधे, वायु, पहाड़, मिट्टी, नदिया, जंगल, जीव-जन्तु आदि सभी मिलकर पर्यावरण का निर्माण करते है।
यानि बिना पर्यावरण के मानव या किसी भी जीव-जन्तु, पेड़ पौधे, वनस्पति आदि किसी का भी अस्त्तिव नही है सभी एक दुसरे के पूरक है यदि इनमे किसी में भी बदलाव होता है तो इसका असर सभी के ऊपर देखने को मिलता है. विश्व पर्यावरण दिवस के माध्यम से लोगो को पर्यावरण के प्रति सुरक्षा को लेकर जागरूक करने के लिए विभिन्न प्रकार के क्रियाकलाप आयोजित किये जाते है जिनमे नाटक, नुक्कड़ मंच, सफाई और प्रदुषण के प्रति लोगो को जागरूक करना, भाषण, संवाद जैसे अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिसमे लोग भाग लेकर पर्यावरण की कैसे सुरक्षा कैसे किया जा सकता है इसके प्रति जागरूक होते है।
मानव और पर्यावरण एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं। पर्यावरण जैसे जलवायु प्रदूषण या वृक्षों का कम होना मानव शरीर और स्वास्थय पर सीधा असर डालता है। मानव की अच्छी-बूरी आदतें जैसे वृक्षों को सहेजना, जलवायु प्रदूषण रोकना, स्वच्छाता रखना भी पर्यावरण को प्रभावित करती है। मानव की बूरी आदतें जैसे पानी दूषित करना, बर्बाद करना, वृक्षों की अत्यधिक मात्रा में कटाई करना आदि पर्यावरण को बूरी तरह से प्रभावित करती है। जिसका नतीजा बाद में मानव को प्राकर्तिक आपदाओं का सामना करके भुगतना ही पड़ता है।संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित यह दिवस पर्यावरण के प्रति वैश्विक स्तर पर जागरूकता लाने के लिए मनाया जाता है।
विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगो को पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर जागरूक करना है इस विश्व पर्यावरण दिवस के माध्यम से लोगो में यह प्रेरित किया जाता है की कैसे हम अपनी संसाधनों को पूरा करते हुए भी पर्यावरण की सुरक्षा को बनाये रखे.
Tuesday, May 5, 2020
बुद्ध पूर्णिमा पर निबंध || Essay on Buddha Purnima in Hindi || बुद्ध जयं...
बुद्ध पूर्णिमा पर निबंध Essay on Buddha Purnima in Hindi
'बुद्ध पूर्णिमा', बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए सबसे बड़ा त्यौहार होता है। इसको 'बुद्ध जयंती' के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू कैलेण्डर के अनुसार वैशाख माह की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाती है। इसीलिये इसे 'वैशाख पूर्णिमा' भी कहा जाता है। यह गौतम बुद्ध की जयंती है। भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण ये तीनों एक ही दिन अर्थात वैशाख पूर्णिमा के दिन ही हुए थे।
बौद्ध धर्म के अनुयायी बुद्ध पूर्णिमा को सम्पूर्ण विश्व मेँ बहुत धूमधाम से मनाते हैं। बुद्ध जयंती का मुख्य उत्सव बोध गया में होता है। बौद्ध धर्म के लोगों के लिए, बोध गया गौतम बुद्ध के जीवन से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। बोध गया श्राइन, बुद्ध की प्रबुद्धता की जगह को चिह्नित करती है। बोध गया भारत में बिहार के गया जिले में एक छोटा सा शहर है। बौद्ध पूर्णिमा के दिन भक्त मंदिरों में दान करते हैं।
भगवान बुद्ध की शिक्षाएं व नियम
बुद्ध की शिक्षाएं पूरी तरह से मनुष्यों को दुख और जीवन के पीड़ा से मुक्त करने के लिए हैं। बौद्ध धर्म की प्राथमिक शिक्षाएं चार मुक्य सत्य, आठवें पथ और अवधारणाएं हैं। यह चार परम सत्य बौद्ध धर्म की नींव हैं। इन चार सत्यों पर केंद्रित उनके ज्ञान के बाद बुद्ध का पहला उपदेश –
चार परम सत्य
सभी मानव परिस्थितियों में पीड़ा होती है।
पीड़ा का कारण होता है।
वह कारण लालसा या इच्छा है।
पीड़ा के समापन के लिए एक ही रास्ता है।
आठ पथ Eight paths
चौथा नोबल सत्य आठवां पथ है, या अभ्यास के आठ क्षेत्रों जो जीवन के सभी पहलुओं को छूते हैं।
सही विश्वास (सत्य में)
सही इरादा (बुराई के बजाय अच्छा करने में)
सही भाषण (असत्य, निंदा और शपथ ग्रहण से बचें)
सही व्यवहार (दोष पूर्ण व्यवहार से बचें)
सही आजीविका (कुछ व्यवसाय जैसे कसाई, प्रचारक, अपमानित थे)
सही प्रयास (अच्छे की तरफ)
सही अनुष्ठान (सत्य का)
सही एकाग्रता (इन नियमों का पालन करने के परिणामस्वरूप)
अवधारणाएं Concepts
बौद्ध धर्म का मानना है कि एक व्यक्ति कुल सही दिशा में आगे बढ़ना तब शुरू कर सकता है जब वह बुद्ध और उनकी शिक्षाओं और उनके मठों में विश्वास रखे। साथ ही पांच मौलिक नैतिक नियमों को अपना कर भी-
हत्या नहीं करना
चोरी नहीं करना
लैंगिक दुराचार या व्यभिचार से विरत रहना
झूठ कभी नहीं बोलना
नशे की लत से दूर
Sunday, May 3, 2020
मदर्स डे पर निबंध || मातृ दिवस पर निबंध || Mother's Day Essay in Hindi...
मदर्स डे पर निबंध – मातृ दिवस पर निबंध – Mother Day Essay in Hindi
मातृ दिवस का मतलब होता है मां का दिन। पूरी दुनिया में मई माह के दूसरे रविवार को मातृ दिवस मनाया जाता है। मातृ दिवस मनाने का प्रमुख उद्देश्य मां के प्रति सम्मान और प्रेम को प्रदर्शित करना है। हर जगह मातृ दिवस मनाने का तरीका अलग-अलग होता है, लेकिन इसका उद्देश्य एक ही होता है।
मातृ दिवस
मातृ दिवस मनाने का शुरुआत सर्वप्रथम ग्रीस देश में हुई थी, जहां देवताओं की मां को पूजने का चलन शुरु हुआ था। इसके बाद इसे त्योहार की तरह मनाया जाने लगा। हर मां अपने बच्चों के प्रति जीवन भर समर्पित होती है। मां के त्याग की गहराई को मापना भी संभव नहीं है और ना ही उनके एहसानों को चुका पाना। लेकिन उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता को प्रकट करना हमारा कर्तव्य है।
मां के प्रति इन्हीं भावों को व्यक्त करने के उद्देश्य से मातृ दिवस मनाया जाता है। यह दिन विशेष रूप से मां के लिए समर्पित है। इस दिन को दुनिया भर में लोग अपने तरीके से मनाते हैं। कहीं पर मां के लिए पार्टी का आयोजन होता है तो कहीं उन्हें उपहार और शुभकामनाएं दी जाती है। कहीं पर पूजा अर्चना तो कुछ लोग मां के प्रति अपनी भावनाएं लिखकर जताते हैं।
मदर्स डे एक ऐसा दिन होता है जो हर बच्चा अपनी माँ के लिये खासतौर से मनाता है। ये एक महत्वपूर्णं उत्सव के तौर पर हर वर्ष मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। स्कूलों में बच्चों के साथ मातृ-दिवस मनाने का प्रचलन है। अपने बच्चों के द्वारा माँ ग्रीटिंग्स कार्ड, विशिंग कार्ड तथा दूसरे खास उपहार प्राप्त करती है। इस दिन पारिवारिक सदस्य बाहर जाकर लज़ीज़ पकवानों का लुफ्त उठाते है तथा और खुशी मनाते है। माँ भी अपने प्यारे बच्चों को ढ़ेर सारा प्यार और उपहार तथा देख-भाल करती है।
स्कूल आने के लिये बच्चों के द्वारा खासतौर से अपनी माँ को आमंत्रित किया जाता है जहाँ पर शिक्षक, बच्चे और माँ मातृ-दिवस को खूब अच्छे से मनाते है। माँ अपने बच्चों के लिये उनकी पसंद के मुताबिक मैक्रोनी, चाउमीन, मिठाई, बिस्किट आदि जैसे कुछ खास पकवान बनाती है। इस दिन को पूरी मस्ती के साथ मनाने के लिये माँ और बच्चे दोनों नृत्य, गायन, भाषण आदि जैसे क्रिया-कलापों में भी भाग लेते है। मातृ-दिवस से संबंधित कार्यक्रमों जैसे गायन, नृत्य, भाषण, तुकबंदी व्याख्यान, निबंध लेखन तथा मौखिक बातचीत आदि में बच्चे भाग लेते है। उत्सव के समापन पर माताओं के द्वारा बनाया गया खास पकवान शिक्षकों और विद्यार्थियों को परोसा जाता है। सभी एकसाथ इसको खाते है और इसका आनन्द उठाते है।
हमारी माँ बहुत खास होती है। थकी हुई होने के बावजूद वह हमारे लिये हमेशा मुस्कुराती रहती है। रात में सोते समय वह हमें बहुत सारी कविताएँ और कहानियाँ सुनाती है। माँ हमारे गृह-कार्य, प्रोजेक्ट और परीक्षा के समय बहुत मदद करती है। वह हमारे स्कूल ड्रेस का ध्यान रखती है। वह हमें सिखाती है कि खाना खाने से पहले हाथ को अच्छी तरह से साबुन से धो लेना चाहिये। वह हमें अच्छा शऊर, शिष्टाचार, नैतिकता, इंसानियत और हमेशा दूसरो की मदद करना सिखाती है। वह हमारे पिता, दादा-दादी और छोटी बहन का ध्यान रखती है। हम सभी उनको बहुत प्यार करते है और हर सप्ताह उन्हें बाहर घुमाने ले जाते है।
Sunday, April 26, 2020
मज़दूर दिवस पर निबंध || Simple & Short Essay on Labour Day in Hindi || L...
मज़दूर दिवस पर निबंध- Essay on Labour Day in Hindi
प्रस्तावना
विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस “1 मई” के दिन मनाया जाता है। किसी भी देश की तरक्की उस देश के किसानों तथा कामगारों (मजदूर / कारीगर) पर निर्भर होती है। किसी समाज, देश, उद्योग, संस्था, व्यवसाय को खड़ा करने के लिये कामगारों (कर्मचारीयों) की विशेष भूमिका होती है।
मजदुरों के बिना किसी भी देश का विकास नहीं किया जा सकता है और न हीं कोई उद्योग कार्य कर सकता है। मजदुर दिवस को श्रमिक दिवस और मई डे के नाम से भी जाना जाता है। यह ज्यादातर 1 मई को मनाया जाता है।
अधिकांश देशों में यह सार्वजनिक अवकाश का दिन है। यह 1 मई को 80 से अधिक देशों में मनाया जाता है। कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका सितंबर के पहले सोमवार को इसे मनाते हैं। इस तिथि को मनाने के लिए कई देशों की अपनी अलग-अलग तिथि है। हालांकि उत्सव को मनाने का कारण एक समान रहता है और वह श्रम वर्ग की कड़ी मेहनत का जश्न मनाने के लिए है।
मजदूर दिवस की उत्पत्ति
इसकी शुरूआत अमेरिका के शिकागो की हेय मार्केट से हुई 1 मई, 1886 से हुई थी। वहाँ के मजदुरों ने कार्य करने के सीमा 10-12 घंटे तक हटाकर 8 घंटे करने के लिए हड़ताल की थी। उस दिन पुलिस द्वारा चलाई गई गोलियों से सात लोगों की मौत हुई। लेकिन अंत में मजदुरों की माँग मान ली गई थी।
भारत में मजदूर दिवस –
1923 में भारत में मजदुर दिवस पहली बार चैन्नई में मनाया गया था। यह उत्सव भारतीय श्रमिक किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान द्वारा मद्रास में आयोजित किया गया था। इस दिन कॉमरेड सिंगारवेलियर ने राज्य में विभिन्न स्थानों पर दो बैठकें आयोजित कीं। इनमें से एक का आयोजन ट्रालीकलान बीच पर किया गया था और दूसरी को मद्रास हाई कोर्ट के समीप समुद्र तट पर व्यवस्थित किया गया था। उन्होंने एक संकल्प पारित कर कहा कि सरकार को इस दिन राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा करनी चाहिए।
महाराष्ट्र राज्य में 1 मई को महाराष्ट्र दिवस के रूप में मनाया जाता है और गुजरात में इसे गुजरात दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका कारण यह है कि 1960 में इसी दिन महाराष्ट्र और गुजरात को राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ था।
भारत में मजदूर दिवस – उत्सव
बहुत संघर्ष के बाद श्रमिकों को उनके अधिकार दिए गए थे। जिन्होंने इस दिवस के लिए कड़ी मेहनत की उन्होंने इसके महत्व को और अधिक बढ़ा दिया। इस दिन का उनके लिए विशेष महत्व था। इस प्रकार अधिकांश देशों में श्रम दिवस समारोह ने शुरू में अपने संघ के उन नेताओं को सम्मान देने का काम किया जिन्होंने इस विशेष दिन का दर्जा हासिल किया और दूसरों को अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया। प्रमुख नेताओं और श्रमिकों द्वारा एक साथ प्रसन्नता के साथ समय बिताने पर भाषण दिए जाते हैं।
ट्रेड यूनियन मजदूरों की टीम के लिए विशेष लंच और रात्रिभोज या संगठित पिकनिक और आउटिंग आयोजित करते हैं। कार्यकर्ताओं के अधिकारों का जश्न मनाने के लिए अभियान और परेड आयोजित की जाती हैं। पटाखे भी जलाए जाते हैं।
जहाँ कई संगठन और समूहों द्वारा इस दिन पर लंच और पिकनिक और ट्रेड यूनियनों द्वारा अभियान तथा परेड आयोजित किए जाते हैं वहीँ कई लोग इस दिन को बस आराम करने और फिर से जीवंत करने के अवसर के रूप में देखते हैं। वे अपने लंबित घरेलू कार्यों को पूरा करने में समय व्यतीत करते हैं या अपने दोस्तों और परिवार के साथ बाहर जाते हैं।
Tuesday, April 21, 2020
आदि शंकराचार्य पर निबंध || Simple & Short Essay on Adi Shankaracharya in...
आदि शंकराचार्य जी भारत मे एक महान दार्शनिक और धर्मप्रवर्तक के रूप में प्रसिद्ध हैं। आदि शंकरचार्य का जन्म 788 ई. में केरल में कालपी अथवा 'काषल' नामक ग्राम में हुआ था। आदि शंकराचार्य जी के पिता जी का नाम शिवगुरु तथा माता जी का नाम सुभद्रा था।
इनके पिता जी ने इनकी माता जी के साथ सन्तान प्राप्ति के लिए भगवान शिव की बहुत दिनों तक आराधना की थी जिसके बाद आदि शंकराचार्य जी का जन्म हुआ था इसीलिए इनके पिता जी ने इनका नाम शंकर रखा था। जब ये तीन ही वर्ष के थे तब इनके पिता का देहांत हो गया। जब ये पांच(5) वर्ष के थे तभी इनकी माता जी ने इनका यज्ञोपवीत संस्कार करा कर इनको गुरुकुल में वेदों के अध्ययन के लिए भेज दिया था।
ये बड़े ही मेधावी तथा प्रतिभाशाली थे। छह वर्ष की अवस्था में ही ये प्रकांड पंडित हो गए थे और आठ वर्ष की अवस्था में इन्होंने संन्यास ग्रहण किया था। इनके सन्यास धारण करने के सन्दर्भ में एक कथा प्रचलित है जिसमें बताया गया है कि जब इन्होंने अपनी माता जी से सन्यास धारण करने की अनुमति मांगी तो एक मात्र पुत्र होने के कारण इनकी माता ने आदि शंकराचार्य जी को सन्यास धारण करने से मना कर दिया।
परन्तु एक दिन जब ये नदी में नहा रहे थे तो एक मगरमच्छ ने इनके पैर को पकड़ लिया और इसी अवसर का लाभ उठा कर इन्होंने अपनी माता जी से कहा कि मुझे सन्यास धारण करने की अनुमति नही देंगी तो यह मगरमच्छ मुझे मार डालेगा।
आदि शंकराचार्य जी के प्राणों को संकट में देखकर इनकी माता जी ने इन्हें सन्यास धारण करने की अनुमति दे दी। जैसे ही इनकी माता जी ने इन्हें सन्यास धारण करने की अनुमति दी वैसे ही उस मगरमच्छ ने आदि शंकराचार्य जी के पैरों को भी छोड़ दिया।
आदि शंकर ये भारत के एक महान दार्शनिक एवं धर्मप्रवर्तक थे। उन्होने अद्वैत वेदान्त को ठोस आधार प्रदान किया। उन्होने सनातन धर्म की विविध विचारधाराओं का एकीकरण किया। उपनिषदों और वेदांतसूत्रों पर लिखी हुई इनकी टीकाएँ बहुत प्रसिद्ध हैं। इन्होंने भारतवर्ष में चार मठों की स्थापना की थी जो अभी तक बहुत प्रसिद्ध और पवित्र माने जाते हैं और जिन पर आसीन संन्यासी 'शंकराचार्य' कहे जाते हैं। वे चारों स्थान ये हैं- (१) ज्योतिष्पीठ बदरिकाश्रम, (२) श्रृंगेरी पीठ, (३) द्वारिका शारदा पीठ और (४) पुरी गोवर्धन पीठ। इन्होंने अनेक विधर्मियों को भी अपने धर्म में दीक्षित किया था। ये शंकर के अवतार माने जाते हैं। इन्होंने ब्रह्मसूत्रों की बड़ी ही विशद और रोचक व्याख्या की है।
हिंदू कैलेंडर के अनुसार आदि गुरु शंकराचार्य जी की जयंती, प्रत्येक वर्ष के वैशाख माह की शुक्ल पंचमी के दिन देश के सभी मठों में विशेष हवन पूजन तथा शोभा यात्रा निकाल कर मनाई जाती है।
32 वर्ष की अल्प आयु में सन् 820 ई. में केदारनाथ के समीप आदि गुरु शंकराचार्य स्वर्गवासी हुए थे।
Friday, April 17, 2020
अक्षय तृतीया पर्व पर निबंध || Akshaya Tritiya Essay in Hindi || Akshaya ...
अक्षय तृतीया
हिन्दू धर्म के अनुसार अक्षय तृतीया त्यौहार का विशेष महत्व है , अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है। वैसे तो सभी बारह महीनों की शुक्ल पक्षीय तृतीया शुभ होती है, किंतु वैशाख माह की तिथि स्वयंसिद्ध मुहूर्तो में मानी गई है।
इस दिन नए कार्य शुरू करने के लिए शुभ माना जाता है. और कुछ लोग इस दिन अक्षय तृतीया पर सोने खरीदने के लिए भी शुभ माना जाता है। जिस कारण से अक्षय तृतीया के दिन सोने की खरीदारी बढ़ जाती है, जो की समृद्धि का प्रतिक माना जाता है। अक्षय तृतीया की तिथि बहुत शुभ मानी जाती है, इस तिथि को बिना पंचांग देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे- विवाह, गृह प्रवेश, वस्त्र-आभूषण खरीदना, वाहन एवं घर आदि खरीदा जा सकता है। अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि विधान से पूजा किया जाता है, इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी को चावल चढ़ाना, तुलसी के पत्तो में भोजन के भोग लगाना और विधिवत पूजा पाठ करने का विधान है, फिर इस दिन दान देने की भी परंपरा है जिससे सुख समृधि की कामना किया जाता है। इस दिन गंगा स्नान करने से तथा भगवत पूजन से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। यहाँ तक कि इस दिन किया गया जप, तप, हवन, स्वाध्याय और दान भी अक्षय हो जाता है।
महत्व
पौराणिक कथाओं और प्राचीन इतिहास के अनुसार, अक्षय तृतीया दिन कई महत्वपूर्ण घटनाओं को दर्शाता है-
भगवान गणेश और वेद व्यास ने महाकाव्य महाभारत को इस दिन लिखा था।
इस दिन को भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है |
कहते है- इस दिन, देवी अन्नपूर्णा का जन्म हुआ।
इस दिन, भगवान कृष्ण ने अपने गरीब दोस्त सुदामा को धन और मौद्रिक लाभ प्रदान किया था ।
महाभारत के अनुसार, इस दिन भगवान कृष्ण ने अपने निर्वासन के दौरान पांडवों को ‘अक्षय पात्र दिया था । उन्होंने इस कटोरे के साथ आशीष दिया था कि यह पात्र हमेशा असीमित मात्रा में भोजन से भरा रहेगा तथा कोई भी कभी भूखा नहीं रहेगा।
अक्षय तृतीया के दिन, गंगा नदी पृथ्वी पर स्वर्ग से उतरी थी ।
इस दिन कुबेरा ने देवी लक्ष्मी जी की उपासना की थी, और इस तरह उन्हें भगवान के खजांची होने का काम सौंपा गया।
जैन धर्म में, इस दिन भगवान आदिनाथ, जैनों के पहले भगवान की स्मृति में मनाया जाता है।
धार्मिक क्रिया
भगवान विष्णु के भक्त, अक्षय तृतीया के दिन देवता की पूजा करते है और उपवास रखते हैं। बाद में, चावल, नमक, घी, सब्जियां, फलों और कपड़े गरीबों को वितरित करके दान किया करते है। तुलसी का पानी भगवान विष्णु के प्रतीक के रूप में चारों ओर छिड़का जाता है।
अक्षय तृतीया के दिन, कई लोग सोना और सोने से बने आभूषण भी खरीदते हैं। जैसा कि कहा जाता है कि सोना अच्छे भाग्य और धन का प्रतीक होता है , सोना खरीदना इस दिन पवित्र माना जाता है।
लोग इस दिन नया व्यापार उद्यम, निर्माण कार्य आदि शुरू करते है।
अन्य अनुष्ठानों की तरह इस दिन लोग गंगा में एक पवित्र स्नान भी करते है , जौ को एक पवित्र आग में भेंट करते है, तथा प्रसाद बनाया जाता है और दान किया जाता है।
भविष्य में अच्छा भाग्य सुनिश्चित करने के लिए आध्यात्मिक गतिविधियों जैसे ध्यान और पवित्र मंत्र का जप करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
Thursday, April 16, 2020
पृथ्वी दिवस पर निबंध || Earth Day Essay in Hindi || विश्व पृथ्वी दिवस ||...
Earth Day Essay in Hindi
'विश्व पृथ्वी दिवस' प्रत्येक वर्ष 22 अप्रैल को सम्पूर्ण विश्व में मनाया जाता है। विश्व पृथ्वी दिवस की स्थापना अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन के द्वारा 1970 में एक पर्यावरण शिक्षा के रूप में की गयी और अब इसे 192 से अधिक देशों में प्रति वर्ष मनाया जाता है।
पृथ्वी हमारी धरोहर है, इसकी रक्षा करना हमारा कर्त्तव्य है। प्रकृति ने हमें सूर्य, चाँद, हवा, जल, धरती, नदियां, पहाड़, हरे-भरे वन और धरती के नीचे छिपी हुई खनिज सम्पदा धरोहर के रूप में हमारी सहायता के लिए प्रदान किये हैं। प्रकृति द्वारा दी गई ये सभी वस्तुएं सीमित हैं। विश्व पृथ्वी दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण सुरक्षा के बारे में लोगों के बीच जागरुकता बढ़ाना है।
यह एक वार्षिक आयोजन है, जिसे विश्व भर में पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्थन प्रदर्शित करने के लिए आयोजित किया जाताा है। इस दिन विश्व स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कई समुदाय और एनजीओ, पृथ्वी सप्ताह का समर्थन करते हुए पूरे सप्ताह विश्व के पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर पृथ्वी को बचाने के लिए अनुकरणीय कदम उठा रहे हैं।
विश्व पृथ्वी दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण सुरक्षा के बारे में लोगों के बीच जागरुकता बढ़ाना है। यह दिन इस बात के चिंतन-मनन का दिन है कि हम कैसे अपनी वसुंधरा को बचा सकते हैं।
पृथ्वी हमारी धरोहर है, इसकी रक्षा करना हमारा कर्त्तव्य है। प्रकृति ने हमें सूर्य, चाँद, हवा, जल, धरती, नदियां, पहाड़, हरे-भरे वन और धरती के नीचे छिपी हुई खनिज सम्पदा धरोहर के रूप में हमारी सहायता के लिए प्रदान किये हैं। प्रकृति द्वारा दी गई ये सभी वस्तुएं सीमित हैं। विश्व पृथ्वी दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण सुरक्षा के बारे में लोगों के बीच जागरुकता बढ़ाना है।
यह एक वार्षिक आयोजन है, जिसे विश्व भर में पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्थन प्रदर्शित करने के लिए आयोजित किया जाताा है। इस दिन विश्व स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कई समुदाय और एनजीओ, पृथ्वी सप्ताह का समर्थन करते हुए पूरे सप्ताह विश्व के पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर पृथ्वी को बचाने के लिए अनुकरणीय कदम उठा रहे हैं।
विश्व पृथ्वी दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण सुरक्षा के बारे में लोगों के बीच जागरुकता बढ़ाना है। यह दिन इस बात के चिंतन-मनन का दिन है कि हम कैसे अपनी वसुंधरा को बचा सकते हैं।
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