Monday, April 6, 2020

Short Essay on Guru Tegh Bahadur Ji in Hindi || गुरू तेगबहादुर जी || Gur...





गुरू तेगबहादुर जी

गुरू तेग बहादुर सिखों के नवें गुरु थे। देश, धर्म को बचाने के लिए गुरू तेगबहादुर जी ने अपने प्राणों का बलिदान दिया।

उनके द्वारा रचित ११५ पद्य गुरु ग्रन्थ साहिब में सम्मिलित हैं

जीवन- गुरू तेगबहादुर जी का जन्म सिक्खों के आठवें गुरू श्री हरगोबिन्द जी के घर अमृतसर में 1621 ई० में हआ। गुरू तेग बहादुर जी ने गद्दी पर बैठते ही सिक्खों का संगठन किया। आनन्दपुर नाम का स्थान बसाया। पटना में गुरू तेग बहादुर जी के घर गुरू गोबिन्द सिंह जी का जन्म हुआ। उन्होने कश्मीरी पण्डितों तथा अन्य हिन्दुओं को बलपूर्वक मुसलमान बनाने का विरोध किया। औरंगजेब ने गुरू जी को गिरफ्तार कर लिया। गुरू जी को यातनाएं दी गईं। इस्लाम स्वीकार न करने के कारण 1675 में मुगल शासक औरंगजेब ने सबके सामने उनका सिर कटवा दिया।
गुरुद्वारा शीश गंज साहिब तथा गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब उन स्थानों का स्मरण दिलाते हैं जहाँ गुरुजी की हत्या की गयी तथा जहाँ उनका अन्तिम संस्कार किया गया। विश्व इतिहास में धर्म एवं मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में गुरु तेग बहादुर साहब का स्थान अद्वितीय है।
गुरू जी सच्चे अर्थों में तेजस्वी, महात्मा और देशभक्त थे। धर्म, मानवता, सिद्धांतों के लिए शहीद होने वाले गुरु तेग बहादुर जी का स्थान सिख धर्म में विशेष महत्व रखता है। इन्हें "हिन्द-दी-चादर" के नाम से भी जाना जाता है। अभिमान और छल से रहित थे।

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